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Aatmavishvaas kya hai -5 तरीके जिससे आप अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं

Aatmavishvaas किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व को जांचने का के एहम पहलू होता है किसी भी व्यक्ती को कामयाबी दिलाने के लिए एहम होता है तो जानते आत्मविश्वाहस क्या होता है।

आत्मविश्वास क्या है-5 तरीके जिससे आप अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं

आत्मविश्वास (Aatmavishvaas) क्या है।

आत्मविश्वाश का शाब्दिक अर्थ होता है अपने ऊपर बिश्वाहस या आप इसे ऐसे भी कहे सकते है अपने अंतर आत्मा पर विश्वास यानि खुद पर यकीनन इसी लिए आपको आपकी जिंदगी में कामयाब होने के लिए इसकी सबसे जायदा जरुरत होती है और ये बहुत महत्वपूर्ण है।

Aatmavishvaas kya hai
Aatmavishvaas kya hai | Photo by Pixabay

आत्मविश्वाश एक ऐसी महत्वपूर्ण जरुरत है यदि ये किसी के पास न हो तो वो अपनी जिंदगी में चाहे जितने यतन कर ले वो कभी कामयाब नहीं हो सकता और यदि गलती से भी वो कामयाब हो गया तो उसे उसकी खुद की कामयाबी पर यकीं नहीं होगा।

मुख्य बिंदु यह देखने के लिए कि आपमें आत्मविश्वास (Aatmavishvaas) है या नहीं

यदि आपसे पूछा जाये की आपके अंदर आत्मविश्वाश है की नहीं है तो आप इस सवाल का जवाव कैसे दोगे आपको अपने आप से कुछ सवाल पूछने होंगे या इन मुख्य बिन्दुओ को देखना होगा ताकि आप सम्ह्ज सके की आपमें आत्मविश्वाश है या नहीं ।

निरंतर प्रयास

जब आप निरंतर प्रयास करते हैं तो वो आपके अंदर एक अलग तरह का साहस भर देता है जिससे आपके अंदर आत्मविश्वाश आ जाता है आप कठिन से कठिन काम बड़ी आसानी से कर लेते हैं और इस कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति में देख सकता है।

निरंतर सीखना

जब आपके अंदर निरंतर सिकने की चाह जग जाएगी तब आपको किसी भी आंतरिक और बाहरी किसी भी तरीके की कोई दिकत नहीं होगी इसका मुख्य कारण है आप निरंतर रूप से कुछ न कुछ सिख रहे है जो आपके सोच को और संहजह को पूरी तरह से बदल देती है और वो जानकारी आपको आत्मनिभर और अरम्विश्वाश से परिपूर्ण व्यक्ति बनती है।

विफलता स्वीकार करना

जब आप अपनी विफलता को स्वीकार करते है तो आप ये मान लेते है की आपमें या आपके काम करने के तरीके में कुछ न कुछ कमी है और और जब आप ये स्वीकार कर लेते है तब आपको पता होता है की वो गलत्ती फिर से नहीं होनी चाहिए और उससे एक नया विश्वाश आपको अपने ऊपर होने लगता है।

आत्मविश्वाश से हर व्यक्ति के जीवन पे क्या असर पड़ता है।

आत्मविश्वाश हर वयक्ति के लिए उतना ही जरुरी होता है जितना की किसी भूखे के लिए खाना और किसी पयासे के लिए पानी यदि आपको कीसी लक्स्य का साधना है या आपको आपने जीवन में कुछ करना है तो आपको आपने लक्स्य को साधने के लिए आत्मविश्वाश की जरुरत पड़ने ही वाली है

कुछ भी करने के लिए आपके आप पर्याप्त साधन हो या न हो यदि आपके पास खुद पे विश्वाश नहीं होगा तो आप कुछ नहीं कर पाओगे कहे आप कुछ भी कर लो इसकी मुख्य बजहा है की आप आपने ऊपर ही विश्वाहस नहीं कर सकते थो

आप किसी और चीज़ के ऊपर कैसे यकीं कर प्पओगे आप कैसे तेह कर पाओगे की जो आप कर रहे हो उससे आपको कुछ ना कुछ परिणाम मिलेगा ही मिलेगा क्युकी इसकी कोई बंदिश नहीं है वो पूरी हो ही इसी लिए कुछ भी करने से पहले आपको आपने ऊपर विश्वाश होना बहुत ही तरुरी होता है।

पांच ऐसे जरुरी तरीके जिससे आप अपना आत्मविश्वाश को बढ़ा सकते हैं।

हरहर व्यक्ति किसी न किसी तरह से अपना आत्मविश्वाश को बढ़ना चाहता है। व्यक्ति हर वो तरीके अपनाना चाहता है ताकि उसका आत्मविश्वाश बढ़ सके आपने यदि ऊपर पढ़ा होगा तो आपने इसके बारे में कुछ न कुछ सोचा ही होगा और कुछ न कुछ तेह किया भी होगा फिर भी हम आपको कुछ तरीके बताना कहेगे ताकि आप बड़ी आसानी से अपना आत्मविश्वाश बढ़ा सके।

दृढ़ निश्चय से काम करते रहो

आपने भगवत गीता का बिवरण कही न कही सुना या पढ़ा ही होगा और उसमे भी ये स्पष्ट कहा गया है की आपको किसी न किसी प्रकार का काम करते रहना चाहिए बिना ये बात विचारे की उससे लाभ होगा की नहीं।

आपका लक्ष्य ये नहीं होना चाहिए की की आपको काम से लाभ होगा की नहीं बल्कि ये होना चाहिए की कैसे आप एक निर्धारित काम को अच्छे से अच्छे तरीके से कर सकते है।

यह अलग विचार और विषय है की कर्म केसा होना चाहिए हमें उसके बारे में भी कुछ न कुछ सोचने ही चाहिए यदि कर्म अच्छ होंगे तो फल उसके परिणाम भी ठीक ही होंगे और इसका उल्टा भी हो सकता है।

इसके साथ साथ यदि आप किसी काम को लगातार करते रहोगे बिना उसके फल की इच्छा के तो एक न एक दिन आप उस काम में माहिर हो ही जाओगे और इसी बजहा से आपको अपने ऊपर विश्वास होने लगेगा

निरंतर सीखते रहे और अपने आप को सबिकार करे

यदि आपको अपने आत्मविश्वाश को वढ़ना है तो आपको अपने आप को स्वीकार कर लेना है ताकि आप ये मान और समहज सके की आपकी अभी की क्या परिसिथिति है ताकि आप अपना सही मूल्यांकन कर सके और अपनी खामियों और खूबियों को जाने।

आपको अपनी खूबियों पे घमंड नहीं करना है और न ही आपको अपनी खामियों पे अपने आप को कोसना है इसके बजाये आप अपनी किसी एक खामी को जो की आपके लिए बड़ी महत्वपूर्ण लगाती है उस पर मेहनत करनी होती है और उसे सुधारना है।

इसके साथ साथ आपके अन्दर निरतर सिखाते रहे की धारणा होनी चाहिए ताकि आपका मन किसी एक बिषये के बारे में सोचे जो की आपके लिए विकुल सही हो।

हमेशा आशावादी सोच रखे और खुश और प्रेरित रहने का प्रयास करे

यदि आप हमेशा आशावादी रहने का प्रयास करेंगे तो आप अपने मन में आने वाली नकारात्मक सोच से बच पाएंगे और उससे होने वाले परिणाम आप पर हावी नहीं होंगे।

सोच को आशावादी रखने का एक सबसे अच्छा तरीका है उस विषय या कार्य से होने वाले सभी सकारात्मक विचारो को मन में सोचे और मन में उसका एक काल्पनिक दृश्य तैयार करे ताकि आपको उसे होने वाले परिणामो को जान सके।

आपको ये करते समय ये धयान रखना है की आओ ऐसे जयादा न करे नहीं तो ये आपके आत्मविश्वाश को अति आत्मविश्वाः में बदल देगा।
इसके साथ साथ आपको खुश रहने का और सकारात्म विचारो को ले कर अपने आप को प्रेरित करते रहना चाहिए।

अपनी तुलना न करे

आप अपने जीवन के किसी भी स्तर पे हो आपको अपनी तुलना कभी नहीं करनी है चाहे आपकी स्थिति बहुत ही अच्छी हो या बहुत ही बुरी कयूकि जिस पल आप ये गलती करोगे तो आपका आत्मविश्वाश या तो घमंड में बदल जायेगा या दिशा हीन बिना उत्साह के व्यक्ति हो जायेगे।
आपकी जिंदगी नर्क तुल्य हो जाएगी इसी लिए आपको कभी सपने में भी अपनी तुलना किसी और से नहीं करनी चाहिए।

अपनी छोटी से छोटी जित को सम्मान दे

यदि आप किसी काम को कर रहे हैं या करना चाहते है तो आपको उस मंज़िल तक पहुंचे समय जो भी छोटी से छोटी कामयाबी मिलती है उसे स्वीकार करना चाहिए और सम्मान देना चाहिए और जो भी गलतिया करते है उनसे सिख लेनी चाहिए ।

कैसे कहानिया किसी व्यक्ति के आत्मविश्वाश वढाने में मदत करता है।

जब आप कहानिया सुनते हैं उसका बहुत ही गहरा असर आपके मस्तिष्क और दिल पर पड़ता है और आप उस कहानी के नायक और उस कहानी के खलनायक से आप जुड़ पते हो और सम्ह्ज पाते हो की किस तरह से एक नायक जीता है और कैसे वो खलनायक के द्वारे लिए गए गलत फैसले का भी बड़ी करीबी से निरिक्षण करते हो।

इसी लिए कहानिया एक बड़ी अहम् कड़ी होती है जिसमे आपको कुछ न कुछ सिखने को मिलता है और इस्सके साथ साथ आपको अपना आत्मविश्वाश भेदने का मौका भी मिलता है।

आत्मविश्वाश के कुछ बेहतरीन उदहारण

आत्मविश्वाश और विभिन्न तरीके का ब्यक्तित्व

एक व्यक्ति दो तरह का हो सकता है या थो अंतर्मुखी(introvert ) है या बहिर्मुखी (extrovert )। अंतर्मुखी व्यक्ति वो होता है जो अपनी बात को अपने तक ही सिमित कर देता है और लोगो से जयादा घुलता मिलता नहीं है और आम तोर पे इसे शर्मीले स्वाभाव का व्यक्ति भी कहे देते है।

जबकि के बहिर्मुखी व्यक्ति अपनी बात को अपने तक सिमित नहीं रखता और इसके साथ साथ लोगो से बहुत जयादा मिलता जुलता भी है और इन्हे लोग जयादा तर बहुत ही खुले बिचारो वाला बयक्ति भी कहे देते हैं।

अब इन दोनों में ही आत्मविश्वाश होता है परन्तु ये दोनो एक दूरसे से भिन्न होने के कारण उसे अलग अलग अंदाज़ में लोगो के सामने लाते है।

आम तोर पैर लोग के मन ये धरना होती है की वहिर्मुखी बयक्तित्व के पास जयादा आत्मविश्वाहस होता है पर ऐसा बिलकुल नहीं है फर्क बस इतना है को अंतरमुखी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के पास कम मोके होते है ये सबिता करने केकी उसके पास भी आत्मविश्वाहस है जबकि ऐसा वहिर्मुखी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के पास नहीं है।

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